गुरुजनों का सम्मान और ताड़का जैसे राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना की
बरुआसागर। नगर के मध्य स्थित श्री राम वाटिका में चल रही 9 दिवसीय श्री राम कथा के सष्टम दिवस मंगलवार को कथा वाचक पण्डित विनोद चतुर्वेदी जी महाराज ने भक्तों को श्रीराम की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाया। कथा वाचक आचार्य विनोद चतुर्वेदी महाराज ने भक्तों को बताया कि श्रीराम की बाल लीला प्रभु के बचपन की मनमोहक और आनन्दमयी लीलाओं का वर्णन है। जिसमें वे माता-पिता, भाइयों और सखाओं के साथ खेलते है। गुरुजनों का सम्मान करते और ताड़का जैसे राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना करते हैं, जो उनकी विनम्रता, आज्ञाकारिता और दैवीय स्वरूप को दर्शाती हैं। इन लीलाओं में वे ठुमुकु ठुमुकु चलते, पालने में झूले और माता कौशल्या को अपना विराट रूप दिखाकर चकित करतें , जिससे भक्तजन भाव-विभोर हो जाते हैं। कथा में मुख्य यजमान श्रीमती राधिका अतुल सोनी, गीता कृष्ण गोपाल , पिंकी धीरेन्द्र राय, पूजा सौरभ पाठक,सचिन रजनी चौरसिया, मीरा प्रमोद , प्रशांत अग्रवाल आदि भक्त शामिल हुए । रामायण का पूजन पण्डित प्रवीण तिवारी, पंडित आलोक पिपरैया, पण्डित वेद प्रकाश मिश्रा,पण्डित भूपेन्द्र दीक्षित ने कराया। कथा के मध्य ओरछा के सकलद्वारी के पीठाधीश्वर रितिक महाराज ने पंडित विनोद चतुर्वेदी को माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया ,वहीं मुख्य यजमान अतुल सोनी एंव बनवासी राम मंदिर के पुजारी दीपक त्रिपाठी द्वारा रितिक महाराज जी का स्वागत एंव सम्मान किया इस दौरान मनोज साहू, कैलाश कौशिक, ,कमलेश तिवारी भण्डारी जी,जयशंकर श्रीवास्तव, मनोज राय लाला, सुरेश राय, बालचंद्र राय सतीश बिलगैया,लक्ष्मण ठाकुर, रामगोपाल सेन, रमेश चौरसिया,आदि तमाम लोग मौजूद रहे। आभार युवराज पण्डित नितिन चतुर्वेदी जी महाराज ने किया।
रिपोर्ट : पवन जैन / बरुआसागर





