नया दौर : ऐतिहासिक झांसी स्टेशन अब इतिहास के पन्नों में सिमटने वाला है

झांसी स्टेशन को अब हाईटेक बनाने की तैयारी है
झांसी। झांसी का ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन भवन, जो वर्ष 1880 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित किया गया था। अब जल्द ही इतिहास के पन्नों में सिमटने वाला है। केंद्र सरकार ने इस किलेनुमा एतिहासिक इमारत की जगह एक नया और अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन भवन बनाने का निर्णय लिया है। करीब 145 सालों से देश की आजादी और विकास का साक्षी रहा झांसी स्टेशन न सिर्फ यात्रियों की सुविधा का केंद्र रहा, बल्कि झांसी रानी की पहचान और गौरन भी बना।
ब्रिटिश सरकार ने किले की तर्ज बनाया था रेलवे स्टेशन
ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1880 में झांसी रेलवे स्टेशन के इस भवन का निर्माण किले की तर्ज पर कराया था। इस भवन पर मरुन और ऑफ व्हाइट रंग का विशेष प्रयोग किया गया था, जो इसे अन्य रेलवे स्टेशनों से अलग पहचान देता था। बताते है कि इस स्टेशन के निर्माण से पहले ब्रिटिश हुकूमत ने तीन अलग अलग स्थानों का सर्वे किया था। लंबी प्रक्रिया और लगभग एक दशक के अंतराल के बाद यह भव्य किलेनुमा भवन बनकर तैयार हुआ था।
करोड़ों यात्रियों की यादों में बसा है झांसी स्टेशन का भवन
देश हो या विदेश, जो भी यात्री झांसी आता है या इस रेलवे स्टेशन से गुजरता है, वह इस एतिहाससिक इमारत के सामने सेल्फी लिए बिना नहीं रह पाता। करोड़ों यात्रियों की यादों में यह भवन बसा हुआ है। कभी एशिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों में शुमार रहा झांसी रेलवे स्टेशन न केवल बाहर से बल्कि अंदर से भी अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है।
देश की तरक्की की रफ्तार का भी साक्षी है स्टेशन
झांसी रेलवे स्टेशन का उद्घघाटन एक जनवरी 1889 को किया गया था। इसके बाद से यह स्टेशन देश के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में शामिल हो गया। 145 सालों से अधिक समय तक यह भवन रेलयात्रियों की सेवा करता रहा, यह वही स्टेशन है जिसने भारत की आजादी से पहले का दौर देखा और आजादी के बाद देश की तरक्की की रफ्तार का साक्षी बना।
1857 की क्रांति का गवाह रहा स्टेशन
यह रेलवे स्टेशन झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की 1857 की क्रांति का भी गवाह रहा है। आज इसे वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता है। इस भवन की वास्तुकला में झांसी के किलों की झलक साफ दिखाई देती है, जो इसे शहर की एतिहासिक विरासत की अहम हिस्सा बनाती है।
बुंदेलखंड की विरासत से सजेगा आधुनिक स्टेशन
145 साल बाद केंद्र सरकार ने इस एतिहासिक इमारत को हटाकर एक नया आधुनिक स्टेशन बनाने का निर्णय लिया है। नया स्टेशन भवन बुंदेलखंड की विरासत, संस्कृति और साहित्य से प्रेरित होगा। इसमें हाईटेक साधन संसाधनों के साथ यात्रियों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्टेशन की क्षमता बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य की जरुरतों को पूरा किया जा सके।
नया स्टेशन पूरी तरह से आधुनिक होगा : पीआरओ
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि स्टेशन के बाहर निकास कार्य शुरु कर दिए गए हैं। एेतिहासिक भवन में संचालित सभी कार्यालयों को पहले वैकल्पिक स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद इस पुराने भवन को तोड़कर नए स्टेशन के निर्माण का कार्य शुरु किया जाएगा। उनका कहना है कि नया स्टेशन पूरी तरह आधुनिक होगा और यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।
रिपोर्ट : बालेन्द्र गुप्ता ( सम्पादक )

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    रिपोर्ट : बालेन्द्र गुप्ता

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