बीट प्रणाली पुलिसिंग की मूल इकाई है, पर सूचना के अभाव से अपराध नियंत्रण में कठिनाई आती रही
एकीकृत व एआई आधारित ऐप से अपराधी संबंधी सूचना स्वतः सभी संबंधित बीटों तक तुरंत पहुँचेगी
इससे समय की बचत होगी तथा निगरानी, सत्यापन व अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ेगी
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस“ की नीति के क्रम में पुलिस व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली बीट पुलिसिंग को अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकसित किये गये यक्ष एप के सफल क्रियान्वयन हेतु पुलिस मुख्यालय में दिनांक 24.01.206 से 27.01.2026 तक आयोजित तीन दिवसीय व्यवहारिक प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का राजीव कृष्ण पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 द्वारा शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस महा
निदेशक, उ0प्र0 ने अपने संबोधन में कहा कि थाना व्यवस्था स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित है, परन्तु प्रभावी पुलिसिंग के लिए बीट प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण इकाई रही है, जो पिछले 100-125 वर्षों से पुलिस की मूल संरचना का आधार रही है। बीट कांस्टेबल की भूमिका ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। समय के साथ बीट क्षेत्रों का आकार एवं संख्या मैनपावर की उपलब्धता के अनुसार बदलती रही है, जिससे अपराधियों की सही जानकारी संकलन एवं अद्यतन में कठिनाइयाँ आती थीं। ‘फर्द क’ एवं ‘फर्द ख’ जैसी व्यवस्थाएँ होते हुए भी व्यावहारिक रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावी नहीं हो पाता था। परिणामस्वरूप अपराधियों की गतिविधियों, उनके निवास स्थान एवं आपराधिक इतिहास की समुचित जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती थी।
अभियानों के दौरान भी सूचना के अभाव में कार्यवाही अपेक्षाकृत कम प्रभावी रहती थी। इस समस्या के समाधान हेतु पूर्व में ‘त्रिनेत्र’, ‘बीट प्रहरी’, ‘ऑपरेशन पहचान’ जैसे विभिन्न ऐप्स विकसित किए गए, जिनसे आंशिक सुधार हुआ।
इन सभी अनुभवों को समाहित करते हुए बीट कर्मियों, हल्का एवं थाना प्रभारियों की सुविधा के लिए एक एकीकृत ऐप विकसित किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी समावेश किया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से किसी अपराध की प्रविष्टि होते ही संबंधित सभी बीटों एवं थाना क्षेत्रों को अपराधी की सूचना स्वतः एवं तुरंत उपलब्ध हो जाएगी। इससे समय की बचत होगी तथा अपराधियों की निगरानी और सत्यापन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
उन्होंने विशेष रूप से कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक “मास्टर फाइल्स” में बीट क्षेत्र, गाँव, मोहल्ला एवं अन्य मूल सूचनाओं की सही प्रविष्टि अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रारंभिक डाटा शुद्ध होगा तो आगे का विश्लेषण एवं कार्यवाही सटीक होगी, अन्यथा त्रुटियाँ लंबे समय तक बनी रहेंगी।
पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 द्वारा अपने संबोधन के अंत में विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐप उत्तर प्रदेश पुलिस को आधुनिक एवं नई पीढ़ी की पुलिसिंग की ओर ले जाएगा तथा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से इसे गंभीरता से समझकर प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अमिताभ यश अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था , एस0के0 भगत अपर पुलिस महानिदेशक अपराध , श्री शलभ माथुर पुलिस महानिरीक्षक कार्मिक/पुलिस महानिदेशक के जीएसओ, यक्ष एप निर्माण में सहयोग प्रदान करने वाली कम्पनी के अधिकारी एवं प्रशिक्षण हेतु आये अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
यक्ष ऐप की मुख्य विशेषतायें
प्रदेश की सभी बीटों की Geo&Fencing एवं फ्रीजिंग कर प्रत्येक बीट की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है।
पारंपरिक बीट बुक को डिजिटल बीट बुक में परिवर्तित कर रियल टाइम अपडेट एवं सुरक्षित डेटा संरक्षित किया गया है।
AI एवं Big Data आधारित अपराधी प्रोफाइलिंग से अपराधियों की गतिविधियों पर सटीक और सतत निगरानी संभव हुई है।
अपराध की संवेदनशीलता, समय, Modus Operandi एवं प्रयुक्त शस्त्र के आधार पर Criminal Scoring System विकसित किया गया है।
Face] Voice] Text एवं Vehicle Search जैसी AI आधारित सुविधाओं से अज्ञात अपराधों के अनावरण में सहायता मिल रही है।
Advance Gang Analysis एवं CrimeGPT के माध्यम से अपराध पैटर्न और गैंग नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है।
बीट स्तर पर Local Intelligence एवं Beat Information System के माध्यम से अपराध-पूर्व सूचनाएँ और संवेदनशील गतिविधियाँ दर्ज की जा रही हैं।
रिपोर्ट / बालेन्द्र गुप्ता सम्पादक

कृति शर्मा, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड एवं राउंड टेबल इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। टाटा एआईजी एवं राउंड टेबल इंडिया के प्रतिनिधि विशेष रूप से मुंबई एवं
दिल्ली से कार्यक्रम में शामिल हुए ।




