झांसी प्रशासन को ठोस कार्रवाई के निर्देश
नगर की गंदगी नदी में, वही पानी लोगों को पिलाया जा रहा
झांसी । पहूंज नदी के प्रदूषण, सीवेज प्रवाह और अतिक्रमण के गंभीर मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कड़ा रुख अपनाते हुए झांसी प्रशासन को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह आदेश प्रधान पीठ, नई दिल्ली में पारित किया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि राज्य स्तर पर संज्ञान और जिला स्तर पर कार्रवाई के मुख्य सचिव द्वारा मामले का संज्ञान लेकर जिला प्रशासन, झांसी को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं तथा जिला स्तर पर अनुपालन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। एनजीटी के समक्ष आवेदक की ओर से प्रस्तुत तथ्यों व फोटो साक्ष्यों में यह सामने आया कि पहूज नदी क्षेत्र में लगातार ठोस अपशिष्ट (कचरा), गंदे नालों का पानी, और अतिक्रमण के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है तथा जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। इससे आसपास के क्षेत्रों में पीने के पानी, कृषि, और जनस्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।
पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की प्रक्रिया के लिए नियम बनाने संबंधी प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रदूषण फैलाने वालों पर कानूनी व आर्थिक दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा एनजीटी में यह जानकारी दी गई कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से जुड़े नियमों के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से ड्राफ्ट नियम तैयार किए जा चुके हैं, जो वर्तमान में विचाराधीन हैं।
क्षेत्र में भयंकर दुर्गंध और गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषण फैल गया
आवेदक भानु सहाय ने न्यायाधिकरण के समक्ष बताया कि झांसी नगर क्षेत्र से निकलने वाला ठोस अपशिष्ट एवं मल-मूत्र से दूषित नाले/सीवेज सीधे पहूज नदी में डाले जा रहे हैं, जिससे नदी में भारी मात्रा में कचरा, जलकुंभी, सड़नजन्य अपशिष्ट और मल-मूत्र जमा होकर कई फीट मोटी गाद (स्लज) बन चुकी है। इससे पूरे क्षेत्र में भयंकर दुर्गंध और गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषण फैल गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यही दूषित नदी जल ‘दतिया गेट फिल्टर सिस्टम’ के माध्यम से नगर की पेयजल आपूर्ति से जोड़कर आम नागरिकों के घरों तक सप्लाई किया जा रहा है। मजबूरी में नगरवासी इसी प्रदूषित पानी का उपयोग पीने, भोजन बनाने और दैनिक कार्यों में कर रहे हैं, जिससे व्यापक जनस्वास्थ्य संकट और महामारीजन्य स्थिति उत्पन्न हो रही है।
छह सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रस्तुत की जाए
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को निर्देश दिया कि छह सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रस्तुत की जाए, जिसमें सीवेज रोकने, कचरा प्रबंधन, नदी सफाई, गाद हटाने, अतिक्रमण हटाने तथा भविष्य की स्थायी योजना का स्पष्ट विवरण हो। साथ ही प्रतिवादी संख्या 2 जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग और 9 जिलाधिकारी झांसी को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं। न्यायाधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण फैलाने वालों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की प्रक्रिया के लिए नियम बनाए जा रहे हैं, ताकि दोषियों पर आर्थिक व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। यह मामला अब केवल नदी प्रदूषण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, प्रशासनिक जवाबदेही और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।
रिपोर्ट : बालेन्द्र गुप्ता




