महोबा : प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री ने दी थी चरखारी नगर को बुन्देलखण्ड के कश्मीर की संज्ञा

स्वामी गोवर्धन नाथ को जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयास से ही मिलेगा राजकीय मेले का दर्जा
इस मेले का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है
महोबा। बुन्देलखण्ड के महोबा जिले में चरखारी ऐसा नगर है जो अपने उद्भव काल से ही बेहद समृद्धशाली रहा है l यहाँ कि नैसर्गिक प्राकृतिक सुंदरता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है यहाँ के हरियाली से आच्छादित पहाड़, यहाँ का मंगलगढ़ दुर्ग, यहाँ कमल के पुष्पों से आच्छादित सरोवरों को देखकर ही प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. गोविन्द वल्लभ पंत द्वारा नगर को बुन्देलखण्ड के कश्मीर की संज्ञा दी गई थी इसी के साथ चरखारी स्टेट के राजाओं द्वारा नगर को धार्मिक, व्यापारिक, और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद समृद्वशाली बनाया गया था, 108 कृष्ण मंदिरों के एक साथ नगर के गौवर्धन नाथ मेला परिसर में विराजने के साथ कार्तिक मास में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, एक माह तक लगने वाले गौवर्धन मेला जिसका आज भी जीता जागता प्रमाण है, जिसमें क्षेत्रीय आम लोगों की अत्यधिक सहभागिता रहती है मेले का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है लेकिन अफसोस सरकार और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते स्वतन्त्रता के बाद से चरखारी समृद्ध होने की बजाए अवनति की ओर ज्यादा गया है, यहाँ की उपेक्षा का आलम यह है जहाँ छोटे छोटे कस्बों में भी आदर्श बस स्टैन्ड नजर आ जाते हैं वहीं तहसील मुख्यालय और विधानसभा का दर्जा प्राप्त चरखारी में अभी तक एक बस स्टैन्ड नहीं बन पा रहा है, जनता को लालीपॉप दिखाने के लिए कई बार बस स्टैन्ड का शिलान्यास किया गया जो अभी तक असितत्व विहीन है इसी प्रकार मेडीकल कालेज के बनने के लिए भी करहरा कला के पास बेहद प्रचारित करते हुए लोगों को मेडीकल कॉलेज मिलने का सपना दिखाया गया लेकिन हुआ कुछ नहीं, 1883 से निरन्तर चले आ रहे मेला सहस्त्र गोवर्धन नाथ जू एक धार्मिक एवं ऐतिहासिक मेला है लेकिन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण समुचित प्रयास न किए जाने से आज तक इस मेला को राजकीय मेला का दर्जा नहीं मिल पाया, जनप्रतिनिधियों के मेले के प्रति निष्क्रियता को दर्शाता है तथा बुन्देलखण्ड के महत्वूर्ण मेला को राजकीय मेला का दर्जा नहीं मिल पा रहा है। उदासीनता की वजह से ही
स्वतन्त्रता के पूर्व मंदिर श्री बटुक भैरव नाथ जी का 8 दिन लगने वाला मेला और गणगौर मंदिर का मेला अब पूर्णरूप से बन्द हो चुके हैं l मेला सहस्त्र श्री स्वामी गोवर्धन्नाथ जू महाराज को लगते हुए 141 वर्ष पूर्ण हो चुके है जिसे बुन्देलखण्ड क्षेत्र के गौरव के रूप में जाना जाता है तथा ख्याति प्राप्त मेला है लेकिन जनप्रतिनिधियों द्वारा जिस तरह से इस मेला की उपेक्षा की जाती है वह निन्दनीय है तथा मेले के गौरवशाली इतिहास की उपेक्षा है। हालांकि विधान परिषद सदस्य एमएलसी जितेन्द्र सिंह सेंगर के आम लोगों की भावनाओं को सदन में पुरजोर तरीके से रखने की वजह से लोगों में आशा का संचार हुआ है क्योंकि एमएलसी जितेन्द्र सिंह सैंगर द्वारा चरखारी मेला और कजली मेला महोबा को लेकर राजकीय मेले की मांग रखी गई है जिससे लोगों में मेले के दिन बहुरने की आस जगी है। आम लोगों की माँग है कि यहाँ के जिला एवं तहसील के सभी जनप्रतिनिधियों को अभी से एक साथ संयुक्त प्रयास करना चाहिए जिससे चरखारी मेला के लगने के समय कार्तिक मास तक राजकीय मेले का दर्जा मिल सके और यहाँ की जनता अपने जनप्रतिनिधियों पर भी गर्व की अनुभूति कर सके l

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