मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आकांक्षात्मक विकास खंड कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा बैठक सम्पन्न
लखनऊ। मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में आकांक्षात्मक विकास खंड कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रगति की गहन समीक्षा हेतु विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम से जुड़े इंडिकेटर्स में पिछड़े विकास खंडों की स्थिति, डेटा की गुणवत्ता तथा सुधारात्मक कदमों पर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग आकांक्षात्मक विकास खंडों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पोषण, बुनियादी ढांचा एवं सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में तेजी से प्रगति सुनिश्चित करें ताकि राज्य के पिछड़े ब्लॉकों में समग्र विकास हो तथा योजनाओं का लाभ अधिकतम लाभार्थियों तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि पोर्टल पर संबंधित इंडिकेटर्स में त्रुटिरहित डेटा का अंकन कराया जाए। उन इंडिकेटर्स में जहां आकांक्षात्मक विकास खंडों की प्रगति अभी भी राज्य औसत से कम है, सुधार हेतु प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही जिन इंडिकेटर्स में अभी भी विकास खंडों की प्रगति राज्य औसत से कम है, उनके लिए जनपद एवं विकास खंड स्तर से समन्वय स्थापित कर लक्षित प्रयास किए जाएं।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आकांक्षात्मक विकास खंडों के अनुश्रवण हेतु विभाग अपनी प्राथमिकता अनुसार संबंधित महत्वपूर्ण नवीन इंडिकेटर्स उपलब्ध कराएं तथा इन खंडों में शत-प्रतिशत अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। इंडिकेटर्स में प्रगति की जनपद/विकास खंड स्तर के अधिकारियों के साथ त्रैमासिक समीक्षा एवं फ्रंट लाइन वर्कर्स हेतु नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा इनकी सूचना एवं कार्यवृत्त नियोजन विभाग को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि इंडिकेटर्स की वर्तमान प्रगति के अनुसार ब्लॉक डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी (BDS) को अद्यतन किया जाए। विभागों द्वारा निर्धारित 50 इंडिकेटर्स का डेटा API के माध्यम से नियोजन विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश कुमार मेश्राम, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।
रिपोर्ट : बालेन्द्र गुप्ता

कृति शर्मा, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड एवं राउंड टेबल इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। टाटा एआईजी एवं राउंड टेबल इंडिया के प्रतिनिधि विशेष रूप से मुंबई एवं
दिल्ली से कार्यक्रम में शामिल हुए ।
निदेशक, उ0प्र0 ने अपने संबोधन में कहा कि थाना व्यवस्था स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित है, परन्तु प्रभावी पुलिसिंग के लिए बीट प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण इकाई रही है, जो पिछले 100-125 वर्षों से पुलिस की मूल संरचना का आधार रही है। बीट कांस्टेबल की भूमिका ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। समय के साथ बीट क्षेत्रों का आकार एवं संख्या मैनपावर की उपलब्धता के अनुसार बदलती रही है, जिससे अपराधियों की सही जानकारी संकलन एवं अद्यतन में कठिनाइयाँ आती थीं। ‘फर्द क’ एवं ‘फर्द ख’ जैसी व्यवस्थाएँ होते हुए भी व्यावहारिक रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावी नहीं हो पाता था। परिणामस्वरूप अपराधियों की गतिविधियों, उनके निवास स्थान एवं आपराधिक इतिहास की समुचित जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती थी।



