ललितपुर , कौशांबी-श्रावस्ती-रामपुर, बस्ती और बलरामपुर के DM बदले, राजेश कुमार होंगे मिर्जापुर के नए कमिश्नर , झांसी नगरआयुक्त होंगी आकांक्षा राणा ,
वाराणसी के सीडीओ होंगे प्रखर सिंह, अश्विनी कुमार बने श्रावस्ती के डीएम, कृत्तिका ज्योत्सना होंगी बस्ती की नई जिलाधिकारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के मकसद से 46 आईएएस अफसरों का तबादला कर दिया है। कई प्रमुख पदों पर बदलाव किया गया है. इनमें मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी जैसे पद शामिल हैं. राजेश कुमार को मिर्जापुर का कमिश्नर बनाया गया है. जबकि प्रखर सिंह को बनारस का सीडीओ बनाया गया है. कौशांबी, श्रावस्ती-रामपुर, बस्ती और बलरामपुर के DM भी बदल दिए गए हैं. सूची के अनुसार राजेश कुमार को मिर्जापुर का नया मंडलायुक्त नियुक्त किया गया है. वे पूर्व में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उनकी नियुक्ति से मिर्जापुर मंडल में विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है. वहीं, मौजूदा मिर्जापुर कमिश्नर आईएएस बालकृष्ण त्रिपाठी का तबादला कर उन्हें सचिवालय सामान्य प्रशासन विभाग का सचिव बनाया गया है. उनकी जगह राजेश कुमार की नियुक्ति की गई है. जिलाधिकारियों के स्तर पर भी बड़े बदलाव हुए हैं. इसके अलावा प्रखर सिंह को वाराणसी का मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बनाया गया है. वाराणसी जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व के शहर में उनकी नियुक्ति से स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा सफाई जैसे कार्यों में तेजी आएगी।
वंदिता श्रीवास्तव होंगी कुशीनगर की नई सीडीओ : धनलक्ष्मी को डीजी मत्स्य बनाया गया है. IAS वन्दिता श्रीवास्तव को CDO कुशीनगर बनाया गया है. IAS पूर्ण वोहरा वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बनाए गए हैं. प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम देवराज ने बताया कि यह तबादला सूची राज्य सरकार की नियमित समीक्षा का हिस्सा है, जिसमें अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है. कुल 46 अधिकारियों का तबादला किया गया है।
डॉ. रूपेश कुमार बने सहारनपुर के कमिश्नर : सार्वजनिक उद्यम महानिदेशक संजय कुमार को मौजूदा पद के साथ यूपी मानवाधिकार आयोग का सचिव भी बनाया गया है. डॉ. रूपेश कुमार को मंडलायुक्त सहारनपुर बनाया गया है. इसी कड़ी में अटल कुमार राय को गृह विभाग का सचिव बनाया गया है. भानु चंद्र गोस्वामी को मेरठ का कमिश्नर बनाया गया है।
अतुल वत्स होंगे हाथरस के डीएम : अतुल वत्स को हाथरस का जिलाधिकारी बनाया गया है. हिमांशु नागपाल को वाराणसी का नगर आयुक्त बनाया गया है. योगेंद्र कुमार को अलीगढ़ का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है. राजा गणपति आर को सीतापुर का डीएम बनाया गया है. कृत्तिका ज्योत्सना को बस्ती का डीएम बनाया गया है।
शिव शरण अप्पा जीएन बने सिद्धार्थनगर के डीएम : शिव शरण अप्पा जीएन को सिद्धार्थनगर का डीएम बनाया गया है. पुलकित गर्ग को चित्रकूट का डीएम बनाया गया है. पूर्ण बोहरा को वाराणसी विकास प्राधिकर का उपाध्यक्ष बनाया गया है. रणविजय सिंह को बिजनौर का सीडीओ बनाया गया है. गुंजन द्विवेदी को फिरोजाबाद का नगर आयुक्त बनाया गया है।
अमित पाल बने कौशांबी के जिलाधिकारी : इसी कड़ी में अमित पाल को कौशांबी का डीएम बनाया गया है. महेंद्र कुमार सिंह को रामपुर का सीडीओ बनाया गया है. विपिन कुमार जैन को बलरामपुर का डीएम बनाया गया है।
झाँसी की नगर आयुक्त बनी आकांक्षा राणा तो सत्यप्रकाश होंगे ललितपुर डी एम
आकांक्षा राणा को झांसी का नगर आयुक्त बनाया गया है। सत्य प्रकाश को ललितपुर का डीएम बनाया गया है।अश्विनी कुमार को श्रावस्ती का डीएम बनाया गया है. अजय कुमार द्विवेदी को रामपुर का डीएम बनाया गया है. गुलाब चंद्र को महराजगंज का सीडीओ बनाया गया है. सचिन कुमार सिंह को अमेठी का सीडीओ बनाया गया है.
प्रदेश समाचार / लखनऊ टीम

कृति शर्मा, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड एवं राउंड टेबल इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। टाटा एआईजी एवं राउंड टेबल इंडिया के प्रतिनिधि विशेष रूप से मुंबई एवं
दिल्ली से कार्यक्रम में शामिल हुए ।
निदेशक, उ0प्र0 ने अपने संबोधन में कहा कि थाना व्यवस्था स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित है, परन्तु प्रभावी पुलिसिंग के लिए बीट प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण इकाई रही है, जो पिछले 100-125 वर्षों से पुलिस की मूल संरचना का आधार रही है। बीट कांस्टेबल की भूमिका ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। समय के साथ बीट क्षेत्रों का आकार एवं संख्या मैनपावर की उपलब्धता के अनुसार बदलती रही है, जिससे अपराधियों की सही जानकारी संकलन एवं अद्यतन में कठिनाइयाँ आती थीं। ‘फर्द क’ एवं ‘फर्द ख’ जैसी व्यवस्थाएँ होते हुए भी व्यावहारिक रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावी नहीं हो पाता था। परिणामस्वरूप अपराधियों की गतिविधियों, उनके निवास स्थान एवं आपराधिक इतिहास की समुचित जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती थी।



