सीएम योगी से मिले वरिष्ठ भाजपा नेता पंकज अग्रवाल
जिले के विकास कार्यों पर हुई चर्चा
चित्रकूट। प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने उनके 5, कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर उन्होंने मुख्यमंत्री को होली की शुभकामनाएँ दीं तथा बैंक संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। भेंट में पंकज अग्रवाल ने जिले में हो रहे विकास कार्यों, जनसमस्याओं एवं आवश्यक सुधारों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा एवं बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता को रेखांकित किया व जनता की अपेक्षाओं पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना व जिले के विकास कार्यों को गति देने का आश्वासन दिया। कहा कि प्रदेश सरकार जनता के हित में लगातार काम कर रही है व प्रत्येक जिले में सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
शिक्षकों का फूटा गुस्साः सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई
वित्तविहीन शिक्षकों की हालत बदतर
शिक्षकों की हुंकार, होगा बड़ा आंदोलन
चित्रकूट। कहते हैं, अगर शिक्षा दीपक है, तो शिक्षक उसकी बाती। लेकिन जब यही बाती उपेक्षा की आँधियों में जल-जलकर बुझने लगे, तो शिक्षा का उजियारा भी फीका पड़ जाता है। प्रदेश के शिक्षकों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। सरकार की अनदेखी व वादाखिलाफी से नाराज शिक्षक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
सोमवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय आह्वान पर काली पट्टी बांधकर मूल्यांकन कार्य कर रहे शिक्षकों से प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने मुलाकात की। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को सुना व सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार शिक्षक विरोधी है। शिक्षकों ने पुरानी पेंशन बहाली, सेवा सुरक्षा नियमावली की बहाली, चयन बोर्ड की धारा 12, 18 व 21 को पुनः लागू करने, वित्तविहीन शिक्षकों को सेवा नियमावली में शामिल कर समान कार्य के लिए समान वेतन देने की माँग कई बार की, लेकिन सरकार सिर्फ आश्वासन देकर पीछे हट गई। अब प्रदेशभर के शिक्षक इस बेरुखी को सहने के मूड में नहीं हैं। प्रधानाचार्या कल्पना राजपूत के नेतृत्व में वित्तविहीन शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल सुरेश त्रिपाठी से मिला। इन शिक्षकों ने अपनी दयनीय स्थिति का ब्योरा देते हुए कहा कि प्रदेश में ढाई से तीन लाख शिक्षक बिना सरकारी मानदेय के शिक्षा की मशाल जलाए हुए हैं, लेकिन सरकार ने आज तक उनकी सुध नहीं ली। सरकार की वादाखिलाफी व उपेक्षात्मक रवैया अब असहनीय होता जा रहा है। शिक्षक विधायक ने ऐलान किया कि अगर जल्द ही शिक्षकों की समस्याओं का हल नहीं निकला, तो 14 अप्रैल को राज्य परिषद की बैठक में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस मौके पर जिला मंत्री सूर्यभान सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश प्रसाद, कोषाध्यक्ष अवधेश सिंह, जयशंकर प्रसाद ओझा, सुनील शुक्ला, ऋषि कुमार शुक्ला, रघुनंदन सिंह, प्रधानाचार्य धर्मेंद्र सिंह, डॉ रणवीर सिंह चौहान, राकेश प्रताप सिंह, जेपी मिश्रा, दिनेश मिश्रा, राजेश्वर प्रसाद, धीरेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, महेशचंद्र कटियार, अखिलेश कुमार गौतम, अरुण सिंह समेत बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षकों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
न्यायिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव को पीएम से करेंगे वार्ताः जगद्गुर
चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में संविधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय शाखा विधान भवन लखनऊ के तत्वावधान में भारतीय न्याय संहिता-2023ः समाविष्ट राष्ट्र निर्माण संकल्प की सकारात्मक अवधारणा विषय पर दो दिवसीय विचार गोष्ठी की गई। गोष्ठी का शुभारंभ जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य सहित गणमान्य अतिथियों द्वारा माता सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर किया गया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता-2023 भारतीय न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है, जो समाज में न्याय और सशक्तिकरण की भावना को और अधिक मजबूती देगा। कहा कि न्याय का अर्थ केवल अपराध पर दंड देना नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव और अनुशासन बनाए रखना भी है। उन्होंने इस कानून में कुछ आवश्यक सुधारों की आवश्यकता भी जताई और कहा कि इसे और प्रभावी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुझाव साझा किए जाएंगे। विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि 150 वर्षों के बाद भारतीय न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव आया है। पहले की न्याय संहिता केवल पुलिस प्रशासन को सशक्त करने के लिए थी, लेकिन नए कानून में जनता के अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इस गोष्ठी से प्राप्त सुझावों को भारतीय न्याय संहिता में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि चित्रकूट, जो न्यायप्रिय भगवान श्रीराम की तपोस्थली है, वहां इस विषय पर मंथन होना एक शुभ संकेत है। कहा कि हमारे समाज में जब तक न्याय की भावना नहीं होगी, तब तक राष्ट्र निर्माण का सपना अधूरा रहेगा। इस मौके पर प्राचीन भारत की न्यायिक व्यवस्था एवं महाभारत पुस्तक का लोकार्पण किया गया और आए हुए अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके में न्यायविदों, शिक्षाविदों, विधायकों, प्रशासनिक अधिकारियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।








